Ads Area

अरब मरुस्थल की बद्दू/बदाविन जनजाति - Baddu Janjati In Hindi

इस लेख में हम अरब मरुस्थल में निवास करने वाली बद्दू/बदू/बदाविन जनजाति (Badawins Tribe) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

Baddu Janjati In Hindi


Table Of Content :-


अरब मरुस्थल की बद्दू जनजाति - Baddu Tribe Of Arabian Desert In Hindi 

बद्दू, दक्षिण-पश्चिम एशिया (अरब, इराक, ओमान, सीरिया, जॉर्डन और यमन) के अरबी भाषा बोलने वाले चरागाही खानाबदोश लोग हैं। इन्हें बद्दू/बदू/बदाविन कहा जाता है। 


इस जनजाति के लोग मुख्य रूप से मरुस्थलीय क्षेत्रों में ऊँटों के पालन से जुड़े हुए है। चरागाही क्षेत्रों में रहने वाले कई बद्दू लोग भेड़, बकरी, घोड़े और अन्य पशु भी पालते हैं। अरब प्रायद्वीप के उत्तरी भाग में निवास करने वाले बद्दू लोग ऊँटों के पालन से जुड़े हुए हैं और चारे व जल की तलाश में ये लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं। 


बद्दू जनजाति का निवास क्षेत्र 

बद्दू जनजाति का मुख्य निवास क्षेत्र अरब मरुस्थल हैं। ये जनजाति दक्षिण-पश्चिम एशिया के कई क्षेत्रों में फैली हुई है। अरब प्रायद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग, सीरिया, फिलिस्तीन, हेदज, नज्द, ओमान आदि क्षेत्रों में इस जनजाति का विस्तार है। इनके निवास क्षेत्र की जलवायु गर्म और शुष्क है। चारे और जल की तलाश में ये लोग मौसमी प्रवसन करते हैं। 


प्रायद्वीप के उत्तर में रहने वाले बद्दुओं का अधिक उपजाऊ और बड़े चरागाहों पर नियंत्रण रहता है, जबकि दक्षिण में निवास करने वाले बद्दुओं के पास पशुओं के छोटे-छोटे झुण्ड होते हैं और ये लोग आंतरिक मरुद्यानों पर आश्रित रहते हैं। 


प्रजातीय विशेषताएँ 

  • बद्दू, दक्षिण-पश्चिम एशिया और भूमध्यसागरीय जातियों के मिश्रण से सम्बंधित हैं। 
  • इस जनजाति के लोग मिश्र और सीरिया के कृषक समुदाय से समानता रखते हैं। 
  • इनकी औसत लंबाई 5 फुट 4 इंच होती हैं। 
  • चेहरा लंबा और छोटा होता है इनकी आँखे काली होती है। 
  • बालों का रंग काला व पीला होता है। 


भोजन और पशु  

बद्दुओं का मुख्य भोजन ऊँट का दूध है, इस दूध का सेवन वे महीनों करते हैं। बद्दू अपना दैनिक भोजन ऊंट के खट्टे दूध में पकाते है। इसके अलावा ये जौ, खजूर, आटे की रोटियां, भुने हुए अन्न के दाने और भेड़ का मांस भी खाते हैं। 


बद्दुओं का सबसे महत्वपूर्ण पशु 'ऊँट' हैं। ये लोग ऊंट के बाल रस्सियां और कपड़े तथा अस्थियाँ थैले और बोतल बनाने के काम लेते हैं। इसके अलावा ऊँट का इस्तेमाल यात्राओं, सामान ढोने के लिए भी किया जाता हैं। 


बद्दुओं का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पशु 'घोड़ा' है। घोड़े का इस्तेमाल ये लोग लड़ाई में छोटे और तेज आक्रमणों के लिए करते है। बद्दुओं में घोड़े का मालिक होना प्रतिष्ठा का चिन्ह समझा जाता है, ऊँटों के समान ही सफेद रंग के घोड़े का अधिक महत्व होता है। इस जाति में सिर्फ घोड़ियों का अधिक महत्व हैं इस कारण घोड़े के नर बछड़े को जन्मते ही फेंक देते है।


अर्थव्यवस्था - Badawins Economy In Hindi

बद्दू अर्थव्यवस्था मुख्यतः ऊँट पर निर्भर है क्योंकि ऊँट न केवल भोजन और मूल्यवान वस्तुएँ उपलब्ध कराता है वरन बद्दुओं के पास यही एक बेची जाने वाली महत्वपूर्ण वस्तु होती हैं। मरुद्यानों के बाजारों में व्यापारियों और कृषकों से शस्त्र, वस्त्र और अन्य वस्तुएँ जिन्हें मरुस्थलों में ले जाया जा सकता है, के बदले में ऊँट का सौदा किया जाता है। 

मक्खन और नर बछड़ों के बदले में आटा, जौ, कॉफी और वस्त्र खरीदते हैं। ये लोग फारस की खाड़ी के उत्तरी सिरे पर स्थित कुवैत नगर में घोड़े, चौपाए और भेड़ लेकर जाते हैं और उनके बदले में खजूर, वस्त्र और आग्नेय शस्त्र खरीद कर ले आते हैं। ये लोग मेमने, कच्चा माल और बकरियाँ भी बेचते हैं। 
 

बद्दू लोगों द्वारा अपने शिविर प्रायः जल आपूर्ति स्थान से थोड़ी दूरी पर और चरागाहों की व्यापक पहुँच के मध्य स्थापित किए जाते है। 


ये लोग कृषि को घृणा और अरुचि से देखते हैं और आजीविका के लिए इसका सहारा तभी लेते है, जब उनके पशुओं के झुण्ड महामारी से नष्ट हो जाते हैं अथवा चरागाह की भूमि सीमित रह जाती है। ये लोग मरुद्यानों में अथवा जहाँ कहीं भी सिंचाई के लिए जल प्राप्त हो जाता हैं खजूर, जौ, मक्का, चारा, खरबूजे, फलियाँ और सब्जियाँ उत्पन्न करते है। 

कृषि योग्य भूमि पर खेती की अपेक्षा बागबानी और फलों के बगीचों को प्राथमिकता दी जाती है। सीमित भूमि और जल संसाधनों का उपयोग अधिकतम उत्पादन के लिए किया जाता हैं। 


बद्दू समाज - Badawins Society In Hindi

  • बद्दू जनजाति कई समूहों में विभाजित हैं और ये समूह अरब प्रायद्वीप में फैले हुए हैं।
  • ये लोग छोटे-छोटे समूहों जिसमें 50 से 100 लोग होते हैं में रहते हैं। 
  • बद्दू समाज में पुरुष वंशक्रम के रक्त सम्बन्धों को महत्व दिया जाता है।  
  • बद्दू जाति का मुखिया 'शेख' होता हैं। 
  • इस जाति के लोगों में आपसी सम्बन्ध घनिष्ठ नहीं होते हैं, इनमें लगातार प्रतिस्पर्धा और शत्रुता बनी रहती हैं और लड़ाई, हत्या, पशुओं की चोरी आदि यहाँ सामान्य बात हैं। 
  • वस्त्रों से तंबुओं की सिलाई और भोजन बनाने का कार्य स्त्रियों द्वारा किया जाता है। 
  • किसी शिविर में अपरिचित व्यक्ति के पहुँचने पर प्रायः आतिथ्य-सत्कार करने के लिए एक बड़ा  उत्सव किया जाता है, क्योंकि मेहमान की उपस्थिति के कारण मेजबान को भी प्रतिष्ठा मिलती है। 

इन्हें भी देखे - 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Ads Area